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Wednesday, 24 August 2011

रात की सवारी


रात के दो बज रहे थे. जोरों की बारिश हो रही थी. घना अँधेरा था. बादल रह-रहकर गरज रहे थे. थोड़ी-थोड़ी देर पर बिजली चमकती तो आस-पास की चीजें दिखाई पड़ती थीं अन्यथा हाथ को हाथ दिखना भी मुश्किल लग रहा था.  झारखंड के घाटशिला स्टेशन के बाहर रामदीन अपना ऑटो लगाये सवारी का इंतजार कर रहा था. इस मौसम में सवारी मिलने की उम्मीद कम थी फिर भी हो सकता था कुछ देर बाद आनेवाली ट्रेन से कोई सवारी आ जाये. करीब एक घंटे बाद ट्रेन आई. थोड़ी देर बाद बिजली चमकने पर एक 18 -१९ वर्ष की मॉडर्न सी लड़की कंधे पर एक बैग लटकाए बाहर निकलती दिखी. वह सीधे उसके ऑटो के पास पहुंची और मुसाबनी चलने को कहा. रामदीन ने कहा कि रात का वक़्त है इसलिए  वहां चलने पर पांच सौ रूपये लूँगा. नहीं तो दो चार घंटे इंतज़ार कर लीजिये सुबह सौ रुपये में ले चलूँगा. लड़की बोली-अभी दो सौ रुपये रखो बाकी वहां पहुँच कर दूंगी. और ऑटो पर बैठ गयी.

रामदीन ने ऑटो बढ़ा दिया. करीब आधा घंटे बाद वह गंतव्य तक पहुंचा. एक माकन के बाहर लड़की ने गाड़ी रुकवाई और घर से पैसे लेन की बात कहकर अन्दर चली गयी.
काफी देर तक वह नहीं लौटी तो रामदीन अकेले बैठे-बैठे परेशां हो गया. उसने घर का दरवाजा खटखटाया काफी देर बाद एक बूढ़े ने आँखे मलते हुए दरवाजा खोला. उसने पूछा-कौन हो तुम और इतनी रात को किसलिए आये हो...?
रामदीन बोला-जो में साहब थोड़ी देर पहले आई हैं उनहोंने मेरा पूरा भाडा नहीं दिया है.
बूढ़े ने आश्चर्य से उसकी और देखा. बोला-यहाँ तो कोई में साहब नहीं रहतीं. मैं अकेला रहता हूँ.
रामदीन की नज़र एक फोटो पर पड़ी. उसने कहा-यही मेमसाहब तो आई थीं. उन्हें स्टेशन से लेकर आया हूँ.
बूढ़े ने उसे आश्चर्य से देखा फिर बोला-इस लड़की को मरे आठ साल हो गए. देखो फोटो पर माला डाला हुआ है. ये मेरी पोती थी. ये कैसे आ सकती है?
रामदीन के होश उड़ गए. वह चुपचाप अपने ऑटो के पास  पहुंचा. उसने देखा कि सीट पर सौ-सौ के तीन नोट रखे थे. उसने नोट जेब में रखा और वहां से बेतहाशा भागा. उस दिन से उसने रात में ऑटो चलाना छोड़ दिया.

-----छोटे   

1 comment:

  1. आप काफी अच्छा लिखते हैं।
    sokhababa.blogspot.com

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