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Wednesday, 21 March 2012

गड्ढे के भूत


हमारे एक मित्र हैं पवन जी.योग के शिक्षक हैं. हाल में वे कुछ जरूरी काम से बस पर आरा से रांची जा रहे थे. रात के करीब एक  बजे यात्रियों को भोजन कराने के लिए बस एक लाइन होटल में रुकी. पवन जी अपना भोजन साथ  लेकर चले थे. पानी भी था. उन्होंने अपनी सीट पर बैठे हुए भोजन कर लिया . कुछ देर बाद मुत्र त्याग करने के लिए नीचे नीचे उतरे. लाइन होटल से जरा हटकर एक गड्ढे के पास उन्होंने खुद को हल्का किया. वापस लौटे तो अचानक उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया. लगा कि कोई पीछे की और खींच रहा है. उनके पांव आगे बढने की जगह अपने आप पीछे की ओर बढ़ने लगे. करीब 15 कदम  वे पीछे चलते गये . अचानक उन्हें अहसास हुआ कि वे 20 फुट गहरे गड्ढे की ओर खिंचे जा रहे हैं. बस दो कदम का फासला रह गया था. उन्होंने अपनी मानसिक शक्तियों  को समेटा और खुद को गिरने से बचाया.थोड़ी देर वहीं बैठ गए.  फिर दो कदम आगे बढ़े और असंतुलित होकर गिर पड़े. कुछ देर बाद उठे और किसी तरह लाइन होटल की एक खाट पर आकर लेट गए. कबतक लेटे रहे उन्हें याद नहीं रहा. बाद में बस के कंडक्टर और खलासी ने उन्हें जगाया. वे बस पर आकर बैठ गए. एकाध घंटे बाद सोचने समझने लायक हुए तो पता चला उनका मोबाइल घटना के दौरान गिर पड़ा था. सारे नंबर उसी में थे. बस कई किलोमीटर आगे बढ़ चुकी थी. अब कुछ उपाय भी नहीं था. इत्तेफाक से उन्हें रांची के एक मित्र के घर का पता याद था. वे वहां पहुंचे. मन अस्थिर रहा. रांची के मित्र को घटना के बारे में बताया तो उन्हें जिज्ञाशा हुई. अगले दिन वे उनके साथ अपनी गाड़ी पर उस होटल को ढूंढते हुए पहुंचे. वहां एक पानवाले ने पूरी कहानी सुनने के बाद बताया कि उस गड्ढे में कई लोगों की गिरकर मौत हो चुकी है. रात को उसमें कई भूत बैठे रहते हैं. कई लोगों ने उन्हें देखा है. वहां मुत्रदान करने के पहले जमीन को थपथपा देना चाहिए. इससे वे हट जाते हैं. ऐसा नहीं करने पर वे गड्ढे में खींचकर मार डालते हैं. आप योगी हैं. इसलिये झटका खाकर रह गये. वरना कुछ भी हो सकता था. पवन जी का मोबाइल तो खैर नहीं मिला. किसी के हाथ लग गया लेकिन पवन जी ने कसम खाई कि रात के वक्त किसी अनजान जगह पर मुत्रदान करने के पहले जमीन को जरूर थपथपा दिया करेंगे.

...छोटे

2 comments:

  1. रवीन्द्रनाथ सिन्हा23 March 2012 at 10:59

    यह बहुत सुंदर कहानी है | क्या यह सत्य घटना है ?

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    1. बिलकुल...वह भी मार्च महीने की ही

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